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सुशांत क्यों हारे तुम-----श्रीराम रॉय


सुशांत
तुम क्यों
जग को छोड़
चले गये
कहाँ


अपनी
जिंदगी से
जो हार गया
छोड़ गया
दुनिया

आखिर
हारता क्यों
अपने जीवन को
सुंदर सी
दुनिया

हारता
मानव केवल
नहीं अन्य जीव
सुना नहीं
कभी

हँसी
ऊपर से
कि कौन जानता
अंदर की
पीड़ा

बातें
हँसते करते
रोते उदासी में
न देखा
कभी

आसमान
जिसके पास
इरादे इतने बुलंद
कैसे हारी
जिंदगी

जबाब
मांगेंगे लोग
मृत्यु के बाद
बोल देना
कारण

कायरता
कैसी  यह
जीवित शरीर को
मृत्यु देता
मानव

अजेय
कहते सब
जिसे वह मानव
क्यों कर
हारता  ❓
@ श्रीराम रॉय (शिक्षक)
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3 टिप्पणियाँ
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मार्मिक रचना।
--
दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि।
sriram ने कहा…
धन्यवाद जी