सावन में पिया का इंतज़ार ,श्रीसाहित्य-निशा अतुल्य

इंतजार

सावन की पड़े फ़ुहार
आँखिया रोये बार बार 
करूँ तेरा इंतजार
घड़ी घड़ी देखूं द्वार ।

पिया आओ मेरे पास
तुमसे मिलने की आस
चातक की जगी है प्यास
तुम बिन न भाये रास ।

अम्बुवाँ पे डाला झूला
सखियाँ कहे तू भुला
अब न मुझे तू रुला
मन मेरा खुला खुला ।

साथ साथ झूला झूलें
आओ चलो नभ छूले
तुम काहे सावन भूले
मन डोले हौले हौले ।

स्वरचित
निशा"अतुल्य"

14 टिप्‍पणियां

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 14 जुलाई 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

निशा"अतुल्य" ने कहा…

धन्यवाद सांध्य दैनिक मुखरित मौन का कृपया मुझे भी भेजें

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (15-07-2020) को     "बदलेगा परिवेश"   (चर्चा अंक-3763)     पर भी होगी। 
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
सादर...! 
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
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hindiguru ने कहा…

सावन में विरह गीत
बहुत सुंदर

s ने कहा…

धन्यवाद जी

निशा"अतुल्य" ने कहा…

धन्यवाद डॉ.रूप चन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी
बदलेगा परिवेश का लिंक मुझे भी मिल जाये तो अनुग्रहित होऊंगी
निशा"अतुल्य" 9837894997

निशा"अतुल्य" ने कहा…

बहुत बहुत आभार
रचना सार्थक हुई आपका स्नेह पा कर

निशा"अतुल्य" ने कहा…

बहुत बहुत आभार
रचना सार्थक हुई आपका स्नेह पा कर

निशा"अतुल्य" ने कहा…

बहुत बहुत आभार
रचना सार्थक हुई आपका स्नेह पा कर

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

मन की वीणा ने कहा…

सुंदर विरह श्रृंगार रचना ।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सावन और विरह साथ में श्रृंगार का तड़का ...
लाजवाब ...

s ने कहा…

शुभ रात्री सर