मुंशी प्रेमचंद महोत्सव, वीर रस की कविता-अंकित अंकुल



भारत के शेरों का भी खून खौलने लगा


चाइना से बैर है ना बैर पाकिस्तान से।
 किंतु तुलना ना होगी भारत महान से। 
भारत को मौन देख  सब डोलने लगे।
गीदड़ सृगाल एक साथ बोलने लगे।
धरा की धारा में जब वायु चलने लगी। 
चीनियों के मुख में जब चीनी गलने लगी।
 तो भारती के भाल का जुनून बोलने लगा।
 भारत के शेरों का भी खून खौलने लगा।


चिंता सब छोड़ चले निज परिवेश की।
 चिंता है तो सिर्फ सुनो शासन आदेश की।
 जिस दिन दिल्ली यह बोल बोलने लगी।
हर हर बम बम की गूंज डोलने लगी।
उस दिन अपने ये बोल भूल जाओगे।
शत्रु मित्रता के सारे रोल भूल जाओगे।
 जिस दिन भारती के लाल जग जाएंगे।
काल भी आया तो महाकाल बन जाएंगे।

📝अंकित अंकुल यादव रायबरेली उत्तर प्रदेश

1 टिप्पणी

सन्ध्या गोयल सुगम्या ने कहा…

वीर रस की सुन्दर कविता