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मुंशी प्रेमचंद महोत्सव, कविता, मेरी प्रियतमा कलम -अंजली खेर


**मेरी प्रियतमा कलम**

        बारह बरसों पुराना
        मेरा-तुम्‍हारा साथ,,,,,
        हर मोड़ पर थामें रखा
       तुमने हाथों में मेरा हाथ,,,,,
         
     तुमको देखते ही
     हसरतों से मैं भर-भर जाती,,,,
     जाने कब कविता-गज़ल और
     कहानियां भी लिख जाती,,,,


    यूं ही चलते रहें हम
    थामें एक-दूजे का हाथ,,,,
    नि:शब्‍द समझा करे एक-दूजे    
   के  दिल की सारी बात,,,,


  रूमानी हो चली आबोहवा
  हवाएं बहने लगी बलखाती,,,,,,
  प्रेमरस से लबरेज़ हो
  बैठी लिखने तुमको प्रेमपाती,,,,

 तुम ही मेरी सच्‍ची मित्र
 बस तुम ही मेरी राज़दार,,,,,
‘’मेरी प्रियतमा कलम’’ है मुझे
तुमसे प्‍यार बेशुमार,,,,,,

 ना लगे हमारी प्रीत को
 किसी की भी बुरी नज़र,,,,
बीते तुम्‍हारे ही संग मेरी
सुबह- शाम और  दोपहर,,

तुम्‍हारी हमसफ़र
;;;;;;;;;;;;

अंजली खेर- 9425810540
सी -206, जीवन विहार
अन्‍नपूर्णा बिल्डिंग के पास
पी एंड टी चौराहा, कोटरा रोड
भोपाल- 462 003






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12 टिप्पणियाँ
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Ritu Thakur ने कहा…
Very very beautiful poem anjali mam..loved it..
Unknown ने कहा…
Very nice Anjali❤️
Priya N ने कहा…
Lovely poem Anjali ji👏👏
shashi bansal ने कहा…
बहुत सुंदर भाव कलम को लेकर , हार्दिक बधाई💐💐
Unknown ने कहा…
Excellent Feeling Tai
Varun ने कहा…
Superb vahini...keep writing...keep going up.....
All the very best