मुंशी प्रेमचंद महोत्सव, मौन शक्ति, ललिता कुमारी वर्मा



 * मौन शक्ति *
विधा- कविता 
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मेरे घर में शान्ति और खुशहाली है,
क्योंकि 
मेरे पास मौन की शक्ति है। 
हर वक्त  दिखाया जाता है,
नीचा मुझे,
मै फिर भी खुश हूँ 
क्योंकि 
मै मौन हूँ  मेरे पास मौन की शक्ति है। 
 इच्छाओं को पनी दबाकर,
रखती हूँ  सबकी इच्छाओं का ख्याल,
क्योंकि 
मेरे पास मौन की शक्ति है। 

हर घर में मारा जा रहा है मुझे।
फिर भी मैं सब के लिए खुश हूँ ।
क्योंकि 
मेरे पास मौन की शक्ति है। 

दहेज़ की खातिर जलाई जाती रहेगी  तू ,                                  कब तक ललित इनको रखेगी खुश। 
अब तो तोङ दे तू 
शक्ति मौन की। 
जीना सीख तू अपने लिए। 
तभी रहेगी नारी तू खुशहाल। 
तोङ  दे तू मौन की शक्ति है। 
तोड़ दे तू मौन की शक्ति। ।

स्वरचित रचना मौलिक 
ललिता कुमारी वर्मा अलीगढ़ उत्तर प्रदेश ।
मो0न0-08445812027

16 टिप्‍पणियां

Unknown ने कहा…

Bahut sundr rchna





Unknown ने कहा…

शुक्रिया

Unknown ने कहा…

बहुत सुंदर

Unknown ने कहा…

शुक्रिया

Unknown ने कहा…

Nice poem ..

Unknown ने कहा…

शानदार

Unknown ने कहा…

सुंदर रचना

rajendra ने कहा…

एक सूक्ष्म अणु भी मौन होता है। पर शक्ति से भरपूर यही अणु ,अपने रौद्र रूप में अणु बम्ब बन महाविनाशकारी हो जाता है।
रचना प्रशंसनीय है।मोलिकता है

Unknown ने कहा…

Very nice poem

Unknown ने कहा…

amazing, very well written, please keep writing , real talent

Unknown ने कहा…

Right

Unknown ने कहा…

बहुत सुंदर.......मौन शक्ति

Unknown ने कहा…

Bhut hi sundr

Unknown ने कहा…

बहुत सुन्दर । हमें आज ही पता चला आपकी इस विधा का

Unknown ने कहा…

Thnx

Unknown ने कहा…

Bahut sundar yatharth ko dikhaya h