मुंशी प्रेमचंद महोत्सव, कविता, रचनाकार-सुषमा सिंह


राधे - श्याम
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 हुआ अवतरण,
खुले सब बंधन,
अचंभित सब रह जाए ।

          कमल नयन,
          चंचल चितवन,
          मंद - मंद मुस्काए ।

यमुना तट,
कदंब के नीचे,
वंशी मधुर बजाए ।

            रूप मोहिना,
            रंग     सांवरा,
            मोर मुकुट लगाए ।

चंदन  भाल,
बैजयंती माला,
पैजनिया मधुर बजाए ।

                 वृंदावन की,
                 कुंज  गली में,
                 गोपियों संग रास रचाए ।

नाथ  नाथ्यो,
नाग कालिया,
ग्वाल बाल हर्षाए ।

               प्रेम दीवानी,
               राधा    रानी
                राधे - श्याम कहलाए ।

बाल्यकाल से,
दीवानी  मीरा,
मधुर भजन सुनाए ।

               जग  तारण,
               आए नटवर,
               जगत पिता कहलाए ।
                                     
                                      सुषमा

15 टिप्‍पणियां

Unknown ने कहा…

बहुत ही उम्दा कविता। सुषमा सिंह की कविताओं में एक अलग ही तरलता होती है जो पाठक को बार बार पढ़ने को मजबूर करती है। सादर अभिवादन

Unknown ने कहा…

वाआह क्या कहना

Shivam Singh Rajput ने कहा…

What a lovely and soulfull poetry by my mother ❤❤love u maa❤

Yash wardhan Rana ने कहा…

Bahoot khoob! Acchi Kavita hain

Surjeet Ghosh ने कहा…

आपके कविता लेखन का स्तर उत्तम कोटि का है। शब्द चयन, रस, अलंकार, छंद, रस एवं गेयता आदि ने आपके कविता का सौन्दर्य बढ़ाया है। हिन्दी साहित्य में मैं आपके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ ।

वंदना नारायण ने कहा…

सरल व सहज शब्दों में कविता बेहद खूबसूरती से बहती चली जा रही है

Rajesh Singh ने कहा…

प्रशंसनीय कविता, आप लिखती रहें।

Unknown ने कहा…

Well written and presented

बेनामी ने कहा…

Amazing poem. Very well written

बेनामी ने कहा…

Beautiful poem

Unknown ने कहा…

Beautiful lines

Unknown ने कहा…

👌

Unknown ने कहा…

Bahut uttam

Unknown ने कहा…

👌👌

Unknown ने कहा…

Laudatory poem