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पढिये सुषमा सिंह की ताजी रचना


कल को जब जाऊंगी मैं,
छोड़ यहजमाना ।
मेरी आशिकी  का 
बनेगा  फसाना  ।।


इस दरख़्त के नीचे
कभी हम मिले थे ।
लता वल्लरी सी
तुमसे लिपटे  थे।।

पूछती हैं सांसें,
पल  पल यही ।
प्यार की वो पहली,
पुलक  कैसी रही।।

क्यों पीछे पड़े सब ,
राज बताना ।
ये इश्क की दरिया
है इसमें डूब जाना।।

मेरी गेसुओं के,
गिरफ्त  में आके ।
गिरफ्तार  हो गये तुम
हल्के हल्के मुस्कुरा  के ।।
 

कुछ रोएंगे,
कुछ लोग हंसेंगे।
कुछ जनाजे के साथ 
कब्र तक चलेंगे  ।।
@सुषमा सिंह

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