वो जो आ गई नजर में जिगर मे बसा लेंगेआँखों को बंद करके पलकों मे छुपा लेंगे, पढिये हिंदी और भोजपुरी रचना_premi

💐 गाना 💐

वो जो आ गई नजर में
जिगर मे बसा लेंगे
आँखों को बंद करके
पलकों मे छुपा लेंगे

घुँघरू की खनक मेरे
सपनो मे जो सुनाती
मदहोश जिसकी आँखें
हरपल मुझे बुलाती
दिल मे छुपी हुई है
जो  बात बता देंगे
आँखों को बंद करके
पलकों में --------------

कोमल है जिसकी काया
माया का रूप है वो
मन को करे प्रफुल्लित
सरदी की धूप है वो
दामन को उसके चंदा
तारों से सजा देंगे
आँखों को बंद करके
पलकों को------------

खुशबू बदन के जिसके
मदहोश करती जाती
शरमा के अपना चेहरा
आँचल में  वो छुपाती
मुझको मिली अगर तो
उसे अपना बना लेंगे
आँखों को--------------
पलकों------------------
वो जो आ गई----------
जिगर में---------------
आँखों को-------------
पलकों में---------------

कवि----प्रेमशंकर प्रेमी ( रियासत पवई )

एक बेटी की सोच
   --------------------   
                              ( कविता )

अपने माता की हरपल दुलारी हूँ मैं
अपने पापा के प्राणों से प्यारी हूँ मैं ।
छोड़कर इनको अब कयूँ है जाना मुझे
कैसा दस्तूर है  जो  निभाना  मुझे ।।

कैसा होगा मुझे जो लेकर जाएगा
हर घड़ी क्या मेरा साथ दे पाएगा ।
देर होगी समझने में रिश्ते  जहाँ
लाज मेरी वहाँ क्या बचा पाएगा ।।

मैं जो खोकर यहाँ से वहाँ जाऊँगी
सोचती क्या बिना इनके रह पाऊंगी ।
डोर रिश्तों की मैं जिसमें बंधी रही
प्यार में माँ पिता के मैं अंधी रही ।।

क्या पता कैसा जीवन मैं जी पाऊंगी
चैन पाऊँगी या घुट के मर जाऊँगी ।
नए रिश्तों में कितना मैं ढल पाऊँगी
देर होगी या जल्दी सम्भल जाऊँगी ।।

अपनी सासू को माता भी मानूंगी मैं
बाप जैसा ससूर को भी जानूँगी  मैं ।
घर में संस्कार अपना लगा दूँगी मैं
हर मुसीबत को घर से भगा दूँगी मैं ।।

आज बेटी हूँ कल जो बहू मैं रहूँ
लाज दोनों कुलों की बचाऊंगी मैं ।
एक रिश्ता निभाकर जो मैं जा रही
दूजे रिश्ते निभाकर दिखाऊंगी मैं ।।

घर में बेटी जो बनकर रही आजतक
बहू ससुराल में बन दिखाऊंगी मैं ।
बहू बेटी में अन्तर न समझे कोई
बहू  बेटी ही है जो बताऊँगी मैं ।।

 न सताए कोई  न जलाए कोई
उसके अरमान को न मिटाए कोई ।
जो कलेजे के टुकड़े को सौंपा जहाँ
और क्या उम्मीद उससे लगाए कोई ।।

थी जो बेटी किसी की अब लक्ष्मी है वो
हर किसी के जीवन की भी रक्षणी है वो ।
जिसके कर्मों  से रौशन होता हर सदन
 क्यों  जलाते है अग्नि में उसका बदन ।।

कवि ----प्रेमशंकर प्रेमी ( रियासत पवई )

( भोजपुरी जुदाई गीत )

                       नेहिया के तोड़ के
                 ----------------------     
काहे के तु चली गयीलु 
हमरा के छोड़ के
काहे बिसराई दिहलु
नेहिया के तोड़ के

कयीसे कहीं तोहरा बिना
जिनिगीया बेकार बा
लोकत कछु नयीखे हमरा
सगरी अन्धार बा 
गलती कवन भयील हमसे
गयीलु मुह मोड़ के
काहे विसराई दिहलु
नेहिया के तोड़के
कहे-----------------
नेहिया---------------

अँखिया में निन्दिया नयीखे
न आवे सपनवा
प्राण बिन भयील हमरी
रानी हो बदनवा
आजा बा विनती हमरी
दुनो हाथ जोड़ के
काहे विसराई दिहलु
नेहिया-------------

तोहरा बिना सुखत नयीखे
अँखियाँ से लोरवा
पोंछे खातिर मिलत नयीखे
रानी तोर अँचरवा
प्राण प्रेमशंकर के गयील
बदनवा के छोड़ के
काहे विसराई दिहलु
नेहिया-------------

काहे के-------------
हमरा के--------------
काहे-----------------
नेहिया----------------

कवि---प्रेमशंकर प्रेमी (रियासत पवई )

1 टिप्पणी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत अच्छी रचनाएँ हैं आपकी।
बधाई हो।