अविरल संघर्षों से टकराने तू अकेला ही खड़ा होगा पर विजय बिगुल बजाने को अकेला अडिग अड़ा होगा_deepa ojha

*युद्ध* 

लड़ता जा तू 
लड़ता जा 
बिना रुके तू बढ़ता जा 
दौड़ नहीं सकता है तो 
तू चल कर अपना सेतू बना 
औरों की ना सोच अब 
तू रहें मंजिल हेतू बना ,
कदम - कदम पर काटें होंगे 
तुझपे हँसने वाले होंगे 
काँटो से तू ढाल बना 
हँसी को तू तलवार बना ,
अविरल संघर्षों से टकराने 
तू अकेला ही खड़ा होगा 
पर विजय बिगुल बजाने को 
अकेला अडिग अड़ा होगा ,
हाँ चोटें तुझपे भी होंगी 
तू भी लहू लुहान होगा 
पर विजय का यह पैगाम होगा 
यह युद्ध अब अविराम होगा 
यह युद्ध अब अविराम होगा । 
   
               *~✍️दीपा ओझा*

1 टिप्पणी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर और सार्थक ।
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ऐसे लेखन से क्या लाभ? जिस पर टिप्पणियाँ न आये।
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तभी तो आपकी पोस्ट पर भी लोग आयेंगे।