इश्क में चैन ओ सुकून क्यों गवाया जाए दुश्मन को अपने दिल में क्यों बसाया जाए_dr bina singh

इश्क में चैन ओ सुकून क्यों गवाया जाए
 दुश्मन को अपने दिल में क्यों बसाया जाए 

हकीकत नहीं पता उसके बारे में हमें कुछ भी 
फकत हाथ अपना उसकी ओर क्यों बढ़ाया जाए 

ईमान और धर्म की कमाई में बरकत समझ 
तो झूठ फरेब से दौलत क्यों कमाया जाए 

गैरत ही जिंदगी का पूंजी शरमाया है अपना 
बेगैरत हो जिंदगी का मान क्यों घटाया जाए 


बीना बता तुझसे भी तो कुछ गुनाह हुए होंगे 
खुदा सब जानता है उससे क्यों छुपाया जाए

डा बीना सिह
 छत्तीसगढ़