कवियों के अपने पटल पर प्रस्तुत है ,वो जबसे मोहब्बत करने लगे हैं /जी भर के शिकायत करने लगे हैं_srisahity


गजल
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वो जबसे मोहब्बत करने लगे हैं
जी भर के शिकायत करने लगे हैं।।

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कहते हैं दिल है पत्थर से बना
पत्थर से उल्फत करने लगे हैं।।

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दिल उनको दिया गलती किया
दिल से ही फुरकत करने लगे हैं।।

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प्यार में बीमार उनके जबसे  हुये
दुनिया को रुखसत करने लगे हैं।।

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वो हमको समझे जो भी मगर
हम उनकी इनायत करने लगे हैं।।
---श्रीराम रॉय

4 टिप्‍पणियां

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल रविवार (18-04-2021) को चर्चा मंच   "ककड़ी खाने को करता मन"  (चर्चा अंक-4040)  पर भी होगी!--सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार कर चर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
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Onkar ने कहा…

बहुत सुंदर

विकास नैनवाल 'अंजान' ने कहा…

बहुत सुन्दर.....

Meena Bhardwaj ने कहा…

सुन्दर भावाभिव्यक्ति।