डॉ बीना सिंह जी की ताजी रचना पढ़िये, जफा वफा से रूबरू होना पड़ा कई बारइस दिल को जख्मी होना पड़ा कई बार_srisahitya

जफा वफा से रूबरू होना पड़ा कई बार
इस दिल को जख्मी होना पड़ा कई बार

मोहब्बत उल्फत निस्बत सब देखा हमने
कभी हंसी तो कभी गम सहना पड़ा कई बार

गिला किससे और शिकवा कौन सुने  यहां 
रिश्ते के खातिर तिजारत करना पड़ा कई बार

जिसे हमने रहबर समझा वो रहजन निकला
बेगैरत होकर मर मर कर जीना पड़ा कई बार

 औलाद सुकून और चैन से सो सके वीना 
मां को आंखों में रात काटना पड़ा कई  बार

डा वीना सिह छग
सर्वाधिकार सुरक्षित

1 टिप्पणी

Sushma Singh ने कहा…

बहुत सुंदर मैम 👍