दिल माटी में सजन गहरे रोप देना, अलौकिक पुष्प प्यार ना तोड़ देना_sushma singh srisahitya


   दिल  माटी  में  सजन  गहरे  रोप  देना,
   अलौकिक  पुष्प  प्यार  ना  तोड़   देना।

   घूप  शीत से भी  इसको  बचाना होगा,
   जमाने के थपेड़े  सह सम्भालना  होगा।

   मद्धम  ना   हो   कभी  रंगे   बिंदिया,
   प्यार   इतना   देना  मोहे   सांवरिया।

   पांव  पड़े  नुपुर  गीत  गाए  रूनझून,
  खनक हंसी की साज खिलखिलाती  गुलशन।
   
   उल्फत से   संवरा  हो  मेरा  यह  बसेरा,
   सुबहो शाम नेह सिंचित  हर्षित मन डेरा ।

   चित   मन   सब  मेरा  तुझको  अर्पण,
   किया   गठजोड़   साथ   जनम जनम।

                       सुषमा सिंह
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(स्वरचित एवं मौलिक)

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