कविता हम अपना पेट काटकर,लातें हैं उनके लिये गिफ्ट,फिर भी वो कर जाती हैं,मेरे पॉकेट की सफाई_akela

कविता 

गजब तुमने जोड़ी बनाई
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हम करवटें बदलतें रहें ,
उनकी याद में रात भर,
वो सारी रात सोते रहे,
घर में चादर तानकर ।

वो खाती  हैं अक्सर ,
रात में हलवा मिठाई,
वो सुलाती हैं हर रात,
हमें खिलाकर दवाई।

हम अपना पेट काटकर,
लातें हैं उनके लिये गिफ्ट,
फिर भी वो कर जाती हैं,
मेरे पॉकेट की सफाई।

हे मेरे गॉड,मेरे भगवान,
गजब तुमने जोडी बनायी,
मैं ठहरा पूरब का छोड़ा,
तुने दी पश्चिम की लुगाई।
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       अरविन्द अकेला

2 टिप्‍पणियां

Unknown ने कहा…

Nice

Sushma Singh ने कहा…

मजेदार है