परवाह करते-करते उसकी उसी पे एतबार कर बैठीसखियों संग बतियाना हंसना भूल उसी पर जानिसार कर बैठी_Dr. Bina Singh

परवाह करते-करते उसकी उसी पे  एतबार    कर बैठी
सखियों संग बतियाना हंसना भूल उसी पर जानिसार कर बैठी

रंग रूप उम्र मजहब के मायने हमें समझ नहीं आता
 शामो शहर दिन रैन उसके नाम करार कर बैठी

 छोटी  बड़ी बातों पर नाराज हो रूठ कर यूं हमें सताना 
फकत  ब्लॉक unblock करने की  खता बार-बार कर बैठी

दिल और दिमाग के बीच जंग छिड़ गया है बीना
 होगा पूर्व जन्म का कोई आशिक इसे स्वीकार कर बैठी


परवाह करते-करते उसकी उसी पे एतबार कर बैठी
सखियों के संग बतियाना हंसना भूल उसीपे जानिसार कर बैठी

डा बीना सिह
 छत्तीसगढ़

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