पढिये डॉ अलका पांडेय, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अग्निशिखा मंच ,मुम्बई की दो दिल को छू लेने वाली ताजी रचनायें_palolife


1 बाल गीत
विषय - बारिश 
@डॉ अलका पांडेय,राष्ट्रीय अध्यक्ष, अग्निशिखा मंच,मुम्बई
झमाझम बरसापानी ...

झमाझम झमाझम बरसा पानी
सावन का झूला झूलाये नानी !!

चिं चिं करती चिड़ियां आती 
पानी  में नहाती , लोट लगती !!

बारिस का मौसम बहुत सुहाना 
खेलने का मिलता खूब बहाना !!

बारिस के पानी में कागज की नाव चलाते 
चुन्नू - मुन्नू मिल कर खूब ताली बजाते !!

पेड़ों की डाली पर फूल की मस्ती 
धरती पर वर्षा की बूंदे हंसती !!

पशु पक्षी सब वर्षा में खूब नहाते
लोट पोट होकर खूब मौज मनाते  

झमाझम झमाझम बरसा पानी
सावन का झूला झूलाये नानी !!

@डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई

2 बालगीत 

पुलकित मन 

ओ मेरे प्यारे बच्चे 
पुलकित है माँ का मन तुमको पाकर 
अच्छा लगता है तुमको चाहकर ।।
तेरी तोतली बातें मन को बहुत भाती ।
पुलक पुलक कर मुझे हंसाती 
ख़ुशियों का है एहसास कराती ।
पुलकित है माँ का मन तुमको पाकर ।।

अपने सिने से तुम्हे लगाकर । 
गोद में अपनी प्यार से बैठाकर ।।
प्रीत का आंचल सदा फैलाकर । 
तेरे हर हरकत पर पागल माँ होती है ।।
तेरे रोने पर होती है हलकान 
रातों की नींदें खोती । 
जाग जाग कर मैं तुझे निहारु 
पुलकित है माँ का मन तुमको पाकर ।।

खेल खेल में घोड़ा बनती ।
पीठ पर मैं तुझे  बैठाती ।।
चोट लगने पर मैं रोती 
अपना ग़म मैं भूल जाती ।।
तेरी हंसी में दुनियाँ मेरी 
तू ही मेरा संसार है ।।
तुमसे दूर नहीं रह पाती 
पुलकित है मां का मन तुमको पाकर ।।
@ डॉ अलका पाण्डेय ;मुम्बई

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