पत्थर दिल क्या जाने जज्बात मुहब्बत, होती है चीज क्या एहसास ए मुहब्बत। सुषमा सिंह_srisahitya

मुहब्बत
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   गजल
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 पत्थर  दिल क्या जाने  जज्बात मुहब्बत, 
 होती  है  चीज क्या एहसास ए  मुहब्बत।
 पत्थर दिल क्या  ------------

 आंखों से कोसों  दूर हो जाती है निंदिया,
 बेखुदी  में जीना  बुरा हाल  ए  मुहब्बत।
 पत्थर  दिल  क्या  -----------

 दिल  ए  सरोवर  में  निखरा  वो  मूरत,
लम्हा लम्हा डूबा इक ख़्याल ए मुहब्बत।
पत्थर दिल क्या  ----------------

सपनों को पर  लगे  ख्वाब रंगीन  हुए,
बेखबर जमाने  से  अंदाज ए मुहब्बत।
पत्थर दिल क्या   ----------------

तरुणायी   की  मार  रूप सुधा  बेशुमार,
अनुभूतियों का मोहक  संसार ए मुहब्बत।
पत्थर  दिल  क्या  ------------------

गली  मुहल्लों  में जब चर्चे  हों सरे-आम,
उन  चर्चों  का मुख्य किरदार  ए  मुहब्बत।
पत्थर  दिल  क्या  --------------

                               सुषमा सिंह
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( सर्वाधिकार सुरक्षित एवं मौलिक)

2 टिप्‍पणियां

ARVIND AKELA ने कहा…

वाह,बहुत खूब।
पत्थर दिलवाले क्या जाने जज्बात।

Sushma Singh ने कहा…

बहुत बहुत आभार सर