ग़ज़ल एक दूजे के हम करीब आ रहे हैं।उन्हें मैं और हम उन्हें भा रहे हैं_dr Bina


ग़ज़ल

एक दूजे के हम करीब आ रहे हैं
उन्हें मैं और हम उन्हें भा  रहे हैं

झीलों के शहर का मौसम न पूछो
 पेशानी पर काले  गेसू  छा रहे हैं

दिलरुबा लिखे बेवफा  लिखे उसे
सितमगर हीमेरे दिल को भा रहे हैं

 मोहब्बत कोहमने इबादत समझा
 इसी खता की हम सजा पा रहे हैं

 ख्वाब अपने  आंखों मे सजा कर  
 बीना गजल इश्क के नया गा रहे हैं
डा बीना सिह
 छत्तीसगढ़

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