लघुकथा । टूटते अंधविश्वास। प्रेमचंद महोत्सव

 

*लघुकथा* - 

*टूटते अंधविश्वास*

               

सुबह-सुबह बहुत बैचेनी से खगिया  को सड़क की ओर जाते देखा था ।आज वह हवा की झोंकों सी उड़ी चली जा रही थी ।उसके गोद में था नन्हा रामपाल ।

रामपाल खगिया का बड़े बेटे रामधनी का बेटा था जो जन्म से निमोनिया बीमारी के चपेट में आने के कारण रामपाल को हँसाता और रुलाता रहता था, उसके साथ खगिया भी हँसती और रोते रहती थी ।मानो रामपाल में उनकी जान बसती हो।हरवक्त मिल जाती थी सरकारी चबूतरे पर खेलाते हुई रामपाल को। खगिया कहीं जाती भी तो अपनी साड़ी के पल्लू में बांध लाती थी कुछ खाने समान रामपाल के लिये ।

                 सड़क की ओर जाते देख , मैंने पूछा था कि सब ठीक है न दादी । अपनी तेज क़दमों को धीमे करते  हुए बोली थी, बस रामपाल बीमार है, यह ठीक हो जाय। छोटका,बड़का,सब से यही आशीर्वाद चाहते हैं । मैंने धीरज बंधाते हुए कहा था कि बजरंगबली सब ठीक कर देंगे । तब सिसकते हुएअपने आँसुओं को रोक कर बोली थी जल्दी ठीक हो जाय । उसकी बातों में करुणा साफ़ झलक रही थी  

         गिरिडीह हॉस्पिटल से जब बच्चे को दिखाकर लौटी थी तो फिर पूछ लिया था कि रामपाल अभी ठीक है न ! तब थोड़ी पास आकर बोली थी कि तुम पढ़े-लिखे लोग विश्वास नहीं करोगे-  रामपाल पर डायन-योगिन,शैतानी हरकतों का भी असर है ।मैंने साफ़ इनकार किया था तथा उसी बरगद पेड़ के नीचे समझाया भी था अपने क्लास के बच्चों की तरह । कहा था कि दादी कुछ नहीं होता है- डायन-योगिन । यह सब मन का भ्रम है ।

     कुछ दिन बाद पता चला कि खगिया अपने पोता को लेकर एक ओझा के पास गई थी और ओझा ने सिरापिण्डा का दोष और पड़ोस की एक महिला का हाथ बताकर ठग लिया था-घर की कारी पठिया(बकरी)और हजार दो हजार रुपये भी । इस मुसीबत में गाँव के चौधरी साहब से लेना पड़ा था कर्ज ! उस कर्ज को चुकाने के लिए  साहूकार के पास बेचने पड़े थे अपने हाथों के पुराने कँगन ।

     कुछ दिनों बाद रामपाल पर दवाईयो की असर हुआ और वह चंगा हो गया । खगिया भी सब समझ गई थी कि कैसे उल्लू बनाते हैं  घर-गाँव में ओझा-गुणी । तभी तो एक दिन  मेरी माँ से कह रही थी कि तोर बबुआ ठीक कहता है कि डायन-योगिन कुछ नहीं होता है । सब पूर्व से जकड़ा हुआ भ्रम होता है । सब पूर्व से जकड़ा हुआ भ्रम होता है ।

                  

*नेतलाल प्रसाद यादव* 


4 टिप्‍पणियां

Ramawtar Kumar ने कहा…

बहुत सुंदर नेतलाल जी keep it up

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (०९-०७-२०२१) को
'माटी'(चर्चा अंक-४१२१)
पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर

शुभा ने कहा…



वाह!सुंदर सृजन ।

Bharti Das ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना