मुन्शी प्रेमचंद लघुकथा प्रतियोगिता छुपा प्यार_hira ji

     छुपा प्यार

आज वो ससुर की डांट से रुष्ट होकर अपने मायके को चली गई। परिवार के बेटे अपने बाप से नाराज हो गए तथा पत्नी अपने पति को बहू के जाने का दोष मढ़ रही थी। ससुर दीना नाथ भी अपनी डांट के कारण अपने आप को दोषी मान रहा था। शायद भलाई की डांट बहू को रास नहीं आयी थी। दीनानाथ ने सिर्फ यही कहा था बहू की साफ-सफाई का ध्यान रखा करो ताकि घर की साफ सुथरा रहे घर के आने-जाने वाले लोगों को बुरा न लगे।
इसी बात से रुष्ट होकर चली गई थी। बहुत दिन हो गये बहू घर नहीं आ रही थी। दीनानाथ को परिवार के सदस्यों ने कारण मानते हुए बहू को वापिस लाने का जिम्मा सौंपा।
दीनानाथ बहू के मायके वालों से मिला और कहा कि मेरे से गलती हो गई है क्षमा चाहता हूं। बहू माता पिता बहुत क्रोधित हुए थे पंरतु दीनानाथ शांत रहा कुछ नहीं बोला।
बाद में बोला कि मैं बहू को घर की साफ-सफाई के लिए नहीं कहूंगा। 
बहू के मां बाप ने कहा घर की साफ-सफाई के लिए घर छोड़ कर नहीं आ सकती है। हमनें इस प्रकार के संस्कार नहीं दिये हैं। 
दीनानाथ ने बहू से ही पूछ लो जी 
बेटा क्या आप ससुर बोल रहें ठीक है। पहलें बहू कुछ हिचकाई फिर बोली जी साफ-सफाई के लिए ही कहा था 
बहू के मां ने कहा कि घर की साफ-सफाई करने से ही घर की इज्जत होती है। दीनानाथ ने गलत नहीं कहा अपने घर जाओ। यह इनका प्यार ही जो तूझे गलती ना होते हुए भी गलती मान रहें और तूझे घर ले जाने के लिए आये हैं। ऐसा ससुर नहीं मिलेगा जो संस्कार भी साथ-साथ दे रहे हैं। बहू को मन में ग्लानि हो रही थी। 

हीरा सिंह कौशल गांव व डा महादेव सुंदरनगर मंडी हिमाचल प्रदेश मोबाइल 9418144751

1 टिप्पणी

hirasingh ने कहा…

ससुर का बहु के प्रति स्नेह दर्शाती लघुकथा