Type Here to Get Search Results !

प्रेमचंद कथा महोत्सव। लघुकथा । प्यारा गांव_Ritu Pragya

लघुकथा

शीर्षक-प्यारा गांव

अरे रमेश! तुम अभी तक यहीं है। गांव में रहने के लिए उच्च शिक्षा हासिल किए थे।शहर जाओ, खूब पैसा कमाकर गरीबी दूर करो।" उसे देखकर अभिनव को बहुत आश्चर्य हुआ।
 मैं कहीं नहीं जाऊंगा। मुझे गांव बहुत प्यारा लगता है। मैं यहीं रहकर आप सबके साथ काम करके परिवार की गरीबी दूर करूंगा। यहां की सुंदरता और अपनापन मुझे मजबूत डोर से बांध रखा है।"रमेश मुस्कराते हुए बोलता है। 
    "यहां तुम्हारे लायक तो कोई काम नहीं है" अभिनव सोच में पड़ जाता है।
     "मैं आप सबके साथ नयी तकनीक से खेती करूंगा , फलदार, छायादार ,औषधिय पौधा लगाकर लगाकर इसकी सुरक्षा करूंगा। परिवार के साथ-साथ गांव की भी गरीबी हरूंगा।" रमेश आत्मविश्वास से बोलता है।
       रीतु प्रज्ञा
    दरभंगा
Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.