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प्रेमचंद कथा महोत्सव में लोकनाथ_srisahity


लघुकथा
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परमिला मैम गांव की स्कूल की शिक्षिका है।उनका पुत्र शिबू बालशुलभ प्रश्न करते रहता है।लेकिन, परमिला इसके सभी प्रश्नों का उत्तर देना टेंशन मान बैठती है। अपनी ग्रामीण भाषा मे उसे भटभटिया बोलती है, जबकि एक शिक्षक को बाल मनोवैज्ञानिक, बालप्राकृतिक का पंडित होना चाहिए।पिता जागेश्वर एक शिक्षित किसान हैं।वे बाल शुलभ अच्छा समझ रखतें हैं।कहतें हैं कि बच्चा जितना प्रश्न पूछे उसके अनुरूप उसे सही उत्तर देना चाहिए।परमिला बोलती है कि लड़का एक मिनट मे बाहर प्रश्न बोलता है।
बाल प्राकृत हमेशा महान खोजी होता है।उसे प्रत्येक सवाल का उत्तर चाहिए, नहीं तो बाधित ,कुंठित और झिझक फांस मे बन्धकर अंकुरित बुद्धि मुर्छित होकर धराशायी हो जाता है।
जागेश्वर खेत में बच्चों के साथ काम करने गया है।पटवन कुंआ जगत पर पिपल बरगद के पौधे उग आएं है, उनके भाई कुल्हाड़ी से काट साफ कर रहे हैं।फिर बोला "भैया पानी मे बिल्ली भी डूब मर गई है, पानी से बड़ा दुर्गन्ध आ रहा है।बेटा शिबू पूछ बैठा"पापाजी आप बरगद पिपल तो रोपते हैं और ये चाचू क्यों काट रहे हैं?
जागेश्वर बाल शुलभ उत्तर बोला--"इन पौधों के पेड़ बड़ा विशाल होते हैं, जगत पर बड़ा पेड़ कुंआ मे गिर जाएंगे, और सुनो, कुंआ जिस पत्थर ईंटों से बना है, उसमें पेड़ की जड़ें घुस कर ढिलाई कर देगें तो ईंट भी उजड़ने लगेंगे, बाद मे कुंआ बिगड़ जाएगा।अतः बरगद और पिपल के पेड़ को बगीचे या फिर रोड के किनारे लगाना चाहिए।अब भी बालक शिबू जगत को बारिकी से देख रहा था।उसे अब चुहे के एक दो बिल दिखाई दे रहे हैं।"बाल मस्तिष्क चलायमान है"।
पापा,"चूहे जगत के पास बिल बनाकर क्यों रहते हैं, इन्हें गिरने का भय नहीं है?जबकि बिल्ली भी गिर मर गई।"
जागेश्वर अपना दिमाग झंकृत किया"एसा उत्तर चाहिए जो आगे कक्षाओं मे पढ़ेगा,"हाँ अब सुनो चुहा बिल्ली की कहानी।
"बिल्ली मांसाहारी जन्तु है, वह चुहा को खाती है।लेकिन हर प्राणी अपने दुश्मनों से अपना रक्षा करता है, वो कैसे?
"धान खेत के मेढ़ मे जब चुहा बिल बनाकर अपने परिवार बच्चों के साथ रहता था ,तो बिल्ली टकटकी लगाए एक दो सदस्य को पकड़ खा जाता था, चुहे को हमेशा भय और दुःख बना रहता था।उसने बिल्ली को मारने का उपाय सोचा।कैसे?
"कुआं जगत के पास बिल बनाकर परिवार के साथ रहने लगा।अपने बच्चों को बाहर निकलने से मना कर रखा था।एक बिल से दुसरे मे चुहा सतर्क हो दौड़ लगाता, मुषिक लोभी बिल्ली टकटकी लगाए हुए चुहे पर झपट्टा मारी।मांसक्षी बिल्ली के नाखूनदार पैर फिसल गए।
फिर क्या हुआ पापा?
बिल्ली कुंआ मे डुबो मरी।"
बुद्धिमान चुहा अपने दुश्मन
 बिल्ली को बिना अस्त्र शस्त्र चलाये, बल से नहीं कल से मारने मे सफल रहा।
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लोकनाथ दाँगी बी.आर.पी.पत्थलगडा।

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1 टिप्पणियाँ
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विजय कुमार ने कहा…
बहुत सुन्दर कहानी