कारगिल विजय दिवस_sushma singh

कारगिल विजय दिवस
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अपने रूधिर से लिख गए अमर कहानियां।
माॅं भारती पर कुर्बान ऐसी सौ सौ जिन्दगानियाॅं।।
पर्वतों  के  ऊपर  काल  बन  खड़े  थे।
ललकार से  इनकी  दुश्मन  डरे डरे थे।।

कफ़न सिर पर  बांधे आज निकले  थे।
मिटने मिटाने पर जैसे  हरेक  तुले‌  थे।।
खिलजी सिकन्दर धूल में मिले थे यहीं।
महाराणा जैसे वीर न होते हैं और कहीं।।

यह शिवा की धरा शिवतत्व रग रग में।
मानो साक्षात् महाकाल आए हों रण में।।
थरथराने लगी  कारगिल की  पहाड़ियां।
जांबाज बेटों ने दुहराए जीत की कहानियां।।
 
हर हर  महादेव  से  गूंजा  दिग्दिगंत।
शर्मसार हुए रकीब भारत मनाया जश्न।।
केसरिया  रंग का  उड़ा  फिर  गुलाल।
ज़र्रा ज़र्रा बोले धन्य धन्य हिन्दुस्तां लाल।।
    ‌                        सुषमा सिंह
                              औरंगाबाद
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( सर्वाधिकार सुरक्षित एवं मौलिक)

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