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दोहे - लीलाधारी कृष्ण कन्हैया_srisahity


लीलाधारी कृष्ण कन्हैया
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दोहा-----
लीला धारी मोहना, रखना मेरी  टेक।
किस मुख से वर्णन करूं तेरे नाम अनेक।।
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आदि अविनाशी अंतर्यामीअवतार तूं,।
कृष्ण कन्हैया, केशव ,कमला के भरतार तूं।
कालीमर्दन ,कंसनिकंदन, करुणानिधि ,करतार तूं।

कमलामुख ,कालिंदी माधव,कांधे पै कमरिया कारि।
कृपाचारी, कमल लोचन, कामकला ,खगधारी।
गोपीनाथ ,गऊ पाल, गोवर्धन, गिरधारी।

गरुड़ध्वज, गजोगामी, गजो धारी, तेरा नाम।
गुणातीत ,गोकुलेश, गोविंदम, घनश्याम।
गुसाई, गोविंद रटूं ,चतुर्भुज, आठों याम।

चंदा पति ,चक्रपाणि, चित हरत चोर है।
जनार्दन ,जगन्नाथ ,ठग नाम तोर है।
जगतपति ,जगदीश ,जुगल किशोर है।

त्रिभुवन पति,त्रिलोकीनाथ ,देवकी दुलारे हो।
दीनबंधु ,दीनानाथ ,यशोदा के प्यारे हो।
दयानिधि ,धरनी धर ,धनुष बाण धारे हो ।

नाम निरंजन, निराकार तूं नटवर नागर नंदलाल।
नवल किशोर, नारायण ,नरहरि भक्तों का तूं प्रतिपाल।
पंच नाभ, और पंचरूप, परमेश्वर तूं है बृजबाल।

बंशीधर ,बनवारी ,बल्लभ ,बंदा पति नाम तेरा।
बाल कृष्ण ,विश्व भरता, वैष्णव है काम तेरा।
भक्त वत्स ,वासुदेव ,पाया ना मुकाम तेरा।

मधुसूदन ,मुरलीधर, माधव, मोहन नाम धराया है।
महिपाल ,मथुरेश ,मुरारी, अद्भुत तेरी माया है।
महानदी, और महाकाली ,तूं यादव नाथ कहाया है।

सत्यचित सांवरिया ,एक हरी नाम तेरा है
करो जी हूजूर दूर ,हृदय में अंधेरा है।
श्याम सुंदर ,सुदर्शन धारी,"सारथि" निज चेरा है


कवि    संत कुमार सारथि नवलगढ़

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2 टिप्पणियाँ
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Kamini Sinha ने कहा…
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (29-8-21) को "बाँसुरी कान्हां की"(चर्चा अंक- 4171) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
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कामिनी सिन्हा


मन की वीणा ने कहा…
श्री हरि के विविध नामों से रचित सुंदर रचना।
अभिनव सृजन।