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मोहब्बत उसे भी थी-ramakant-soni



हां मोहब्बत उसे भी थी, वो प्यार का सागर सारा। 
उर तरंगे ले हिलोरे, अविरल बहती नेह धारा। 

नेह सिंचित किनारे भी, पल पल में मुस्काते थे। 
मधुर स्नेह की बूंदे पाकर, मन ही मन इतराते थे। 

कोई चेहरा उस हृदय को, हद से ज्यादा भाता था। 
एक झलक पाते ही वो, दूर से दौड़ा आता था। 

आंखों आंखों में बातें होती, दिल के जुड़ते तार तभी।
जन्मो जन्मो का नाता है, इतना था एतबार कभी। 

दिल के सारे दर्द जानता, खुशियों की बरसात भी। 
मधुर प्रेम का बहता झरना, लगे चांदनी रात भी। 

उसकी एक हंसी में कितने, प्यार के मोती आते थे। 
हां मोहब्बत उसे भी थी, वो गीत प्यार के गाते थे।

रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान


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6 टिप्पणियाँ
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आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (22-09-2021) को चर्चा मंच       ‘तुम पै कौन दुहाबै गैया’  (चर्चा अंक-4195)  पर भी होगी!--सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार करचर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।

हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
yashoda Agrawal ने कहा…
आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 22 सितम्बर 2021 शाम 3.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
कविता रावत ने कहा…
बहुत ही सुन्दर
मन की वीणा ने कहा…
बहुत उम्दा ।
बेहतरीन सृजन।
आप सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं कि आपने रचना को पसंद किया और लेखक के मनोबल को बढ़ाया है

रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान
आप सभी को हार्दिक धन्यवाद प्रेषित करता हूं कि आपने रचना को पसंद किया रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान