मेरी मजबूर सी यादो ने उम्मीद का दामन अभी नहीं छोड़ा-sitaram


*मेरी मजबूर सी यादें*
"वह मिले ना भी मिले मेरी मजबूर सी यादें मेरी परछाई हैं"
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मेरी मजबूर सी यादों में आज भी वह समाई है

इन्हीं यादों के सहारे दिल ने भी तस्वीर उसकी बनाई है।

तन्हाई में जब ये दिल उसको याद करने लगता है

दिल की बनाई उस तस्वीर ने जिंदगी जीना सिखाई है।

मेरी मजबूर सी यादें हर पल मेरे साथ ही रहती है

कभी हंसाती कभी रुलाती इन्होंने सच्ची प्रीत निभाई है।

ये यादें भी नहीं होती तो जाने मैं कब का क्या कर जाता

उसकी इन यादों ने मेरी सोई हुई उम्मीद जगाई है।

उसकी हसीन यादों के सहारे जीना तो मैंने सीख लिया

 बेवफा ने मुझे छोड़कर जिंदगी दूसरे के साथ बसाई है।

साथ जियेंगे साथ मरेंगे ये कहकर तन्हा सफर में छोड़ दिया

वह मेरी हमसफ़र बन ना सकी यही तो उसकी बेवफाई है।

मेरी मजबूर सी यादो ने उम्मीद का दामन अभी नहीं छोड़ा

वह मिले ना भी मिले मेरी मजबूर सी यादें मेरी परछाई हैं।

सीताराम पवार
उ मा वि धवली
जिला बड़वानी
9630603339

1 टिप्पणी

दिलबागसिंह विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा 13.09.2021 को चर्चा मंच पर होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
धन्यवाद
दिलबागसिंह विर्क