दिल धायल हुआ उसके नैन कटारे-srisahity


गजल
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   ऐ  इश्क की  खुमारी  ना उतरती है।
   हुई कैसी बीमारी जो सिर्फ बढ़ती है।।

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   मैं दीवाना बौराया  फिरता रहता हूं।
   वह पगली ना दिल की समझती है।।


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    दिल धायल हुआ उसके नैन कटारे।
   ओढ़ हया  चूनर खुद में सिमटती है।।
   
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     कैसे बतलाऊं उसको  दिले बेकरारी।
     वो    बदनामी   से   बहुत  डरती  है।।

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     जब जवां दिल धड़कते हैं साथ साथ।
     इस प्यार को दुनियाॅं गुनाह कहती है।।

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     दिल पर जोर किसका चला है कब।
     हुश्न  कातिल होता दुनियां कहती है।।

     
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                                 सुषमा सिंह
                                   औरंगाबाद
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(स्वरचित एवं मौलिक)

4 टिप्‍पणियां

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 13 सितम्बर 2021 शाम 3.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

ARVIND AKELA ने कहा…

वाह,बहुत खूब।

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर रचना।

Sushma Singh ने कहा…

आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद 🙏🙏