Type Here to Get Search Results !

हम नादान हैं कुछ भी सुना देते हैं-srisahity


  जज्बातों की अभिव्यक्ति

हम नादान हैं कुछ भी सुना देते हैं
इल्म वाले इसे तूफान बना देते हैं

लोग शरारा को शोले  बना  देते हैं
और आप हौसलों को बुझा देते हैं

होठों पर हंसी  गम  को छुपाती हूं
अश्क मेरे गम के राज बता देते हैं

आसान नहीं है यू मंजिल को पाना
कोई रहबर मुझे  राह दिखा देते हैं

तूही  मुंसिफ तू गवाह ए मेरे खुदा
औलाद कोक्यों अपनी सजादेते हैं

डॉ बीना "रागी"
छत्तीसगढ़

एक टिप्पणी भेजें

4 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (08-09-2021) को चर्चा मंच      "भौंहें वक्र-कमान न कर"     (चर्चा अंक-4181)  पर भी होगी!--सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार करचर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'   
आलोक सिन्हा ने कहा…
बहुत बहुत सुन्दर सराहनीय गजल
उषा किरण ने कहा…
आसान नहीं है यू मंजिल को पाना
कोई रहबर मुझे राह दिखा देते हैं
वाह…!