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रिसते हुए जिगर के जख्मों को कभी यू पोछा नहीं करते_sitaram

सच्चे लोगों का अच्छा नहीं करते
यहां हर इंसान अपनी तकदीर रब से लिखा कर लाया है
        
जिंदगी में टूटे हुए दिल से कभी जादा सोचा नहीं करते |

रिसते हुए जिगर के जख्मों को कभी यू पोछा नहीं करते |

सच्चा तजुर्बा मेरा अपना है सयाने तू भी इसको समझ ऐसे 

किसी की दुखती हुई रगों को कभी यूं खेचा नहीं करते |

ऐब हर इंसान में होता है किसी मे ज्यादा किसी मे कम होता है

जिसमें कोई ऐब ही न हो उसी से फिर ऐब पूछा नहीं करते |

यहां हर इंसान अपनी यह तकदीर रब से लिखा कर लाया है

जिसकी तकदीर अच्छी हो फिर उसमें कोई लोचा नहीं करते |

जहां पर आम के पेड़ लगाना थे वहां तो बबूल बो  दिए तुमने

पतझड़ के ये मौसम में बंजर जमीन को फिर सिंचा नहीं करते |

बदले की जो आग थी दिल मे वह राख में तब्दील हो गयी

उस दबी हुई आग की राख को यू कभी खुरचा नहीं करते |

मजलूम को गम देखकर किसी को खूब खुशियां मिलती है

ऐसे बेईमान और मक्कार सच्चे लोगों का कभी अच्छा नहीं करते |

 सीताराम पवार
 उ मा वि धवली
जिला बड़वानी
 मध्य प्रदेश
9630603339
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