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राष्ट्र वंदना-ss

राष्ट्र वंदना 
राष्ट्र की आराधना 
शुभ भाव की हो वंदना
सरिता का निर्मल नीर हो। 
गिरि का चमकता भाल हो
पर व्यथा की पीर हो। 
संसार की हो धरा उर्वर 
शस्य का विस्तार हो। 
कोई क्षुधा से न त्रस्त हो 
मानव हृदय में प्यार हो।
बंधुत्व की हो भावना 
अब शांति का साम्राज्य हो। 
कलुषित विचारों का सदा 
अब हर हृदय से त्याज्य हो।
देव से पहले ही हमेशा 
 हो  राष्ट्र  की  ही  वंदना। 
जो  आग  घोलें  प्रेम  में 
दूषित करें अभिव्यंजना।
पावन धरा पर कभी भी 
यह सच हो न परिकल्पना। 
मन- वचन- कर्म महान हो 
हो जगत की यही कामना।।

भूपेश प्रताप सिंह 
पट्टी प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश

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