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कट जाओगे इक दिन फसलों की तरह sushma Singh

गजल
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 कट जाओगे इक दिन फसलों की तरह।
 समझो इन ऋतुओं का आना जाना।।

 बचपन ,जवानी और बुढ़ापे का चक्र।
 जाने किस मोड़ नफस हो जाए बेगाना।।

 जीवन प्रवाह ना रुकता है कभी।
 वक्त निकष पर बाकी है परखा जाना।।

 स्नेह सुवासित हो जीवन सबका।
 डूबे ना कश्ती हर हाल पार जाना।।

 न हो वासना करो ईश आराधना।
 सप्तऋषियों जैसा हो गगन ठिकाना।।
                           सुषमा सिंह
                                 औरंगाबाद
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(सर्वाधिकार सुरक्षित एवं मौलिक)
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