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पुरानी पेंशन कर दो बहाल srisahitya

पेंशन, लोकगीत ( फाग )

पुरानी पेंशन कर दो बहाल ।
मामा किरपा की अभिलाषा है ।।
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भान्जा-भांजी कर दो निहाल ‌
मामा किरपा की अभिलाषा है ।।

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सभी के बच्चे आश लगाये हैं ।
अध्यापक का करियो ख्याल।।
मामा किरपा की.... ......
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बुढ़ापा बोझ बने न बच्चों पे ।
चिंतन करियो होश संभाल ।।
मामा किरपा की... ‌.....
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खुशी है,सोए हुए हैं कर्मचारी ।
जिस दिन जागे होगा वबाल ।।
मामा,किरपा की... ‌‌.. ‌
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नया दल बन जायेगा देखना ।
राजनीति में आये भूचाल ।।
मामा किरपा की... .. ‌
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बचालो कुर्सी अपनी नादानो ।
फिर मत करना हमसे सवाल ।।
मामा किरपा कि........
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अब तक की खुशी किरपा तेरी । 
पुरानी पेंशन की मांगें न टाल ।।
मामा,किरपा की अभिलाषा है -2
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 संकल्प गीत
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जो कदम बढ़े हैं आगे को,
पीछे न हटाये जायेंगे ।
हम पेंशन मांगने आये हैं,
पेशन लेकर ही जायेंगे ।।
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चाहे जितना संघर्ष चले,
बैनर अध्यापक संघ तले ।
संघर्ष चलाने आये हैं
पेंशन लेकर ही जायेंगे ।।
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अंजाम क्या होगा गम ही नहीं,
जिंदा दिल हम,वे-दम ही नहीं ।
टकराओगे-टकरायेंगे ।
पेंशन लेकर ही जायेंगे ।।
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इक दिन ऐसा भी आयेगा,
गुरु-दल सरकार चलायेगा ।
हम,यही समझाने आये हैं,
पेंशन लेकर ही जायेंगे ।।
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    पेंशन गीत नं.---03
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धुन--दिल के अरमां,आंसुओं में बह गए ।
फिल्म-- निकाह
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पेंशन, हमको पुरानी दीजिये ।
नई वाली स्कीम वापिस लीजिये ।।
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पेंशन बेटा है, पेंशन ही बहु ।
सहारा हैं नजदीक रहने दीजिये ।।
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पेंशन डाक्टर, दवाई पेंशन ।
जिंदगी है पेंशन, दे दीजिये ।।
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एक लोटा पानी भी, पैसा मंगे ।
नाती-पोतों के लिए,दे दीजिये ।।
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पेंशन पूजा है, पेंशन ही भजन ।
मानव तन सार्थक बनाने दीजिये ।।
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     गीतकार-- लखन कछवाहा 'स्नेही'
                   पी,एस--नकावल
                   रामनगर(बिछिया)
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