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लेखिका एवं साहित्यकार शिखा गोस्वामी का साक्षात्कार रिपोर्टर प्रतिभा जैन जी द्वारा-ss

लेखिका एवं साहित्यकार शिखा गोस्वामी का साक्षात्कार रिपोर्टर प्रतिभा जैन जी द्वारा

मकस कहानिका के एमपी अध्याय में उप सूचना प्रभारी छ्त्तीसगढ़ की मारो निवासी शिखा गोस्वामी जी का जन्मदिन 14 नवम्बर 2022 को रात्रि 8 बजे बड़ी ही धूम धाम से मनाया गया। जिसमें रिपोर्टर प्रतिभा जैन ने शिखा गोस्वामी की जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक बातें आज आप सभी के सामने खोली।

हेलो शिखा जी आज कौन सा जन्मदिन मना रही हो?
---हैलो प्रतिभा जी,  आज मैं  अपना 27 वाँ जन्मदिन मना रही हूं।

आज के दिन क्या खास करोगी?
---बचपन से अबतक  वैसे तो कभी भी ऐसा नही हुआ कि कुछ खास करूँ मगर हाँ एक अजीब सी ख़ुशी होती हैं इस दिन और पूरे दिन बहुत खुश रहती हूँ। इस दिन बाल दिवस भी होता है तो ज्यादातर बच्चों को कुछ देने में ख़ुशी मिलती हैं और इस दिन सुबह से सबके पैर जरूर छूती हुँ। हां, पर एक ख्वाहिश जरुर मन में है कि मेरे जन्मदिन पर मुझे सरप्राइज पार्टी मिले और ढ़ेर सारे गिफ्ट मिले,क्योंकि हमें गिफ्ट खोलना बहुत बहुत अच्छा लगता हैं।

आपकी दैनिक दिनचर्या क्या है?
--मेरी दिनचर्या ज्यादातर को पसन्द नही आती। सुबह  7 बजे उठती हूँ, फिर प्रातः स्मरण के बाद दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर चाय पीकर नाश्ता बनाती हूं। इसके बाद रसोई के कुछ जरूरी कार्य करने के बाद रसोई साफ करके नहाकर पूजा पाठ करती हूँ। पूजन में ही डेढ़ घण्टे लग जाते हैं,पूजन पश्चात ही कुछ खाती हूँ। तब तक एक बज जाते है। एक घण्टा मोबाइल देखने में बीत जाता हैं और तब तक ट्यूशन के बच्चे आ जाते हैं तो शाम 6 बजे तक इसमें व्यस्त रहती हूं। फिर संध्या पूजन के बाद रसोई के कार्य  करती हूँ। 9 बजे तक खाना खा लेते हैं फिर इसके बाद मोबाइल पर साहित्य से जुड़े कार्य करती हूँ। 11 बजे सोती हूं। यही नित्य दिनचर्या हैं।

सबसे ज्यादा खुशी आपको किसके जन्मदिन मुबारक बोलने पर मिलती है?
---वैसे तो सभी के बोलने पर होती हैं क्योंकि मेरा जुड़ाव सभी से समान हैं, मगर सबसे ज्यादा लगाव अपने भाइयों और बहनों से है। तो उनके जन्मदिन विश करने पर सबसे अधिक खुशी मिलती हैं।

आप क्या सोचती हो सबसे पहले आपको कौन विश करें?
---इस प्रश्न का उत्तर फ़िलहाल नही है हमारे पास, क्योंकि मेरे लाइफ में कोई एक खास व्यक्ति नही है बल्कि मैं हर व्यक्ति को खास मानती हूँ और सबका प्रेम/ आशीर्वाद पाना चाहती हूं।

आपको सबसे बेस्ट गिफ्ट कौन देता है?
---सबसे बेस्ट गिफ्ट मेरे गुरुजन, मेरे परिवार के बड़े बुजुर्ग एवं मेरे नजदीकी फ्रेंड्स देते हैं। यह गिफ्ट है उनका प्यार, अपनापन, सम्मान और आशीर्वाद। यह गिफ्ट ही सबसे अनमोल है मेरे लिए।

आज तक आपको कौन सा गिफ्ट पसंद आया?
--- जब मेरा छोटा भाई जय  class 4 में था तब उसने एक इयररिंग खरीदकर मुझे दिया था। यह सबसे खास गिफ्ट है अब तक के बर्थडे का और यह इयररिंग अब भी मैं सम्भाल कर रखी हुँ। मेरी छोटी बहन प्रिया भी हर साल मुझे कोई ना कोई तोहफा जरूर देती हैं। इन दोनों का गिफ्ट ही सबसे अनमोल होता हैं।


आपकी एक विश बताइये जो आप हमारे साथ साझा चाहती है?
---आप सबके (श्याम सर, रजनी दीदी, प्रतिभा दीदी, प्रियंका दीदी, संतोष दीदी, दीपांशु भैया, कविता दीदी, स्नेहलता दीदी, सुधीर भैया के) साथ में मैं किसी धार्मिक स्थान जाना चाहूँगी और  किसी फाइव स्टार होटल में आप सबके साथ मस्ती भरे लम्हे बिताकर लजीज व्यंजन का आनंद लेना चाहूँगी और हाँ आइसक्रीम जरूर खाऊँगी।

आपका यादगार दिन कौन सा है?
---कक्षा11 में जब स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर चुनी गई थी और साहित्य जगत में जब भी किसी प्रतियोगिता में जीतती हूं ,तो वह सारे पल यादगार बन जाते है।

आपको अगर 3 इच्छाएं पूरी करने का मौका मिले तो क्या क्या करोगी?
---अगर मुझे तीन इच्छा पूरी करने का अवसर मिले, तो मैं सबसे पहले भारत के सारे धार्मिक एवं तीर्थ स्थान के दर्शन करना चाहूँगी। दूसरी इच्छा में दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहूँगी, कुछ बनना चाहूँगी, अपने दम पर। और तीसरी इच्छा में किसी जरूरतमंद की मदद करना चाहूँगी तथा जिंदगी खुलकर जीना चाहूँगी एक पक्षी की तरह।

आज आप एक अच्छी लेखिका हो क्या आप बचपन से लेखिका बनना चाहती थी?
---जी नही... मैं बचपन से लेखिका नही बनना चाहती थी। पढ़ने-लिखने में होशियार जरूर थी, मगर लेखन की कोई जानकारी नही थी मुझे। बचपन से मैं शिक्षिका बनना चाहती थी और बन भी गयी। टीचिंग के दौरान ही कुछ लेखन की कला का विकास हुआ। यह कहना सही होगा कि तत्कालिक हालातों ने मुझे लेखिका बना दिया।


आप रलेखन के साथ साथ और क्या करती है?
---मैं लेखन के साथ ही किताबें पढ़ना पसन्द करती हूँ।ज्यादातर अभी धार्मिक ग्रंथ पढ़ती हूं जैसे वाल्मीकि रामायण और श्रीमद्भागवत महापुराण। इसके अलावा मेरी रुचि ड्राइंग, पेंटिंग, सिंगिंग, डांसिंग, रंगोली एवं वेडिंग कार्ड्स डिजाइन बनाने में है।

आपका  सपना क्या है?
----मैंने अब तक जो भी सपने देखे उसे पूरे किये है। स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर बनना चाहती थी, बन गयी। बचपन से सपना था कि जिस कुर्सी पर मेरे टीचर बैठकर पढ़ाते हैं, कभी मैं भी उस कुर्सी पर बैठूँ और यह सपना भी मैंने पूरा कर लिया,जिस विद्यालय में पढ़ी थी उसी विद्यालय की शिक्षिका रही एक वर्ष तक। फिर लेखिका बनने का सपना देखी और बन गयी।
अब मेंरा सपना है कि मैं एक दिन बहुत सफल लेखिका बन सकूँ। अपनी लिखी उपन्यास पर डॉक्यूमेंट्री बनाऊं और यदि किस्मत ने साथ दिया तो राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पाने का सपना देखती हूँ।
मेरी एक चाहत यह भी है कि जब मैं इस दुनिया को अलविदा कहूँ तो कोई भी ये ना बोले कि अच्छा हुआ, जो चली गयी,,, सब यह बोले, कि लड़की बहुत हिम्मत वाली थी, काफी दम था उसमें, जो उसने किया, वो शायद ही कोई  कर पाये।

आपका पहला साहित्य गुरु कौन है?
---हिमांशु,, मेरे पहले साहित्य गुरु है। अगर आज मैं  लेखिका हूँ तो सिर्फ इनकी वजह से। इन्होंने ही मुझसे एक कविता लिखने को कहा था जो जीवन के अलग अलग चरणों पर आधारित हो और मैंने जब कविता लिखी तो इन्होंने खूब मनोबल बढ़ाया था, कि लिखिए और आगे बढिये। इसके बाद मैंने कभी लिखना बन्द नही किया। हिमांशु मेरे मामाजी है। इनके अलावा मेरी माँ, मेरे परिवार वाले, दीदियां, भैया, दोस्त, मेरे गोस्वामी समाज के अधिकतर आदरणीय जन...जिनसे भी हमें प्रोत्साहन मिला, वे सभी मेरे साहित्य गुरु की श्रेणी में आते हैं।

आपको खाने में सबसे ज्यादा क्या पसंद हैं?
---मुझे सिम्पल खाना पसंद है।,ज्यादा तेल, मिर्ची वाला खाना नही खा पाती। बूंदी कढ़ी, छोले और मटर पनीर मेरे पसंदीदा व्यंजन है। इसके अलावा मिठाई में रसगुल्ला बेहद पसंद है। और हाँ आइसक्रीम बेहद पसंद हैं।

आप अपने जीवन में किसे अपना आदर्श मानती हैं?
---मेरी दादी और मेरी माँ, दोनों मेरे जीवन की सबसे बड़ी आदर्श है। बहुत कोशिश करती हूँ इनकी तरह बनने का, मगर बन नहीँ पाती।

आपने कहा आइसक्रीम आपको सबसे ज्यादा पसंद है,अभी तक आप कितने प्रकार की आइसक्रीम खा चुकी हो?
---मैं गाँव में रहती हूँ, यहाँ अच्छी आइसक्रीम नहीँ मिल पाती। अबतक मैं चॉक्लेट आइसक्रीम, वनीला, फलूदा, कुल्फी, स्ट्रॉबेरी आइसक्रीम खा चुकी हूँ।

आपको कौनसी आइसक्रीम बेहद पसंद है?
---स्ट्रॉबेरी आइसक्रीम।

आपको कविता, कहानी, शायरी, गीत में से सबसे ज्यादा लिखने में क्या अच्छा लगता है?
---मुझे सबसे ज्यादा अच्छा कविता और कहानी लिखने में आता है। कविता लिखते समय दिल की गहराई की भावनाएं शब्द का रुप धारण कर लेती हैं तो कहानी लिखते समय मैं खुद कहानी की एक पात्र बन जाती हूँ।

आप जब लेखन कार्य करती हैं तो आपको कैसा लगता है?
-–बहुत अच्छा लगता है। एक आत्मविश्वास भर जाता है कि मैं एक लेखिका हूँ।

आप जब लेखन के क्षेत्र में आईं तो आपको बहुत से अनुभव प्राप्त हुए होंगे बहुत से ऐसे लोग जिन्हें आप पहले कभी नहीं जानती थीं लेखन के क्षेत्र में आने में क्या आपको ऐसे लोग मिले जो आपके दिल के बहुत खास हो गए?
----जी हां,, मुझे ऐसे बहुत सारे लोग मिले जिनको मैं पहले जानती तक नही थी मगर अब सबको बहुत मानती हूँ ,सम्मान देती हूँ। इसमें कोई सर है, तो कोई भैया, कोई दीदी है तो कोई दोस्त, कोई पिता के समान बिटिया कहते हैं तो कोई माँ की तरह ममता देती हैं। ये कहना सही होगा कि मुझे साहित्य की दुनिया में एक नया परिवार मिला है, जो मुझे अपार स्नेह देते हैं। इसमें खास हैं-श्याम सर, रजनी दीदी, संतोष दीदी, प्रतिभा जी, प्रियंका जी, दीपांशु भैया, सुधीर भैया, प्रभात भैया, रुपा दीदी एवं और भी अनगिनत नाम शामिल हैं।

आपने जब लेखन कार्य शुरू किया तब क्या लिखा था पहले कहानी, कविता, गजल?
---मैंने सबसे पहले दादी के जीवन पर आधारित एक कविता लिखी थी, इसके बाद कहानी लिखना शुरू की।

आपने अपनी पहली रचना कहा पोस्ट की थी?
---पहले मैं सिर्फ लिखती थी, कहीं भेजती नहीँ थी। समाज के अध्यक्ष जी ने पहली बार मेरी रचना को सामाजिक पत्रिका में स्थान दिया। जिससे मेरे मन में आत्मविश्वास जागा और फिर अमर भैया के सहयोग से पहली बार दिल्ली के न्यूज़ पेपर में पिता पर आधारित कविता प्रकाशित हुई।


आपको पहले किसका सहयोग/समर्थन


मिला था लेखन कार्य शुरू करने के लिए या किसी को हराने के लिए आपने अपनी लेखन की स्पीड को बढ़ाया?
----पहले किसी को जानकारी नही थी कि हम लेखन करते हैं। सबसे पहला सहयोग मेरे दीदी भैया का था, इसके बाद जब सफलता मिलने लगी तो घर के सभी लोग मेरा हौसला बढ़ाने लगे और आगे बढ़ने को प्रेरित करने लगे। मैं फिर लगन से लिखने लगी और प्रतियोगिता में जीतने भी लगी।


आज आप हजारों प्इनाम  जीत चुकीं हूं । आपका पहला इनाम कौन सा है और किसने दिया? कहाँ मिली?
----मैंनें पहली उपलब्धि  औरंगाबाद(बिहार) से प्राप्त की थी। इसमें देश के लगभग 150 से ज्यादा साहित्यकारों ने हिस्सा लिया था, जिसमें हमारी "गाँव बहुत याद आता है" कविता ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। जिसके लिए हमें  "तुलसीदास काव्य सम्मान" के साथ ही पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया था।

आपको लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली?
--- मेरी महामाया माँ से। जब मैं लिखती हूं तो उसमें डूब जाती हूँ और अपने आप ही कलम चलने लगते हैं।देवी माँ की कृपा से ही मैं इतना लिख पाती हूँ।

आप अभी क्या करती हैं?
---मैं अभी बच्चो को ट्यूशन पढ़ाती हुँ, साथ ही लेखन करती हूँ। राष्ट्रीय हिन्दी पत्रिका मकस कहानिका  संस्था में उप-सूचना प्रभारी के पद पर कार्यरत हूँ एवं यूथ फेडरेशन की राज्य संयोजक हूँ।

आप आगे क्या करना चाहती हैं?
---अभी फ़िलहाल तो अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहती हूँ, उसके बाद हमारी संस्था मकस कहानिका  के साथ मिलकर कुछ नया करने की कोशिश करुंगी।

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