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राम-ss

  राम 

राम जिसको मैं देख पाता 
सुन रहा युग युगों से
कल्पना रूप है क्या?
मंत्रना का रूप हैक्या?
अन्तर मन से जिसने देखा
सृस्टि का स्वरुप है क्या?
धरती पर अवतार है क्या?
मैं न जानू रूप क्या है?
कैसा रहा वह स्वरुप क्या है?
लिख दिया जिसने भी जैसा
बस वही है हो गया वह राम जैसा।
तुलसी ने भी लिख दिया है
बाल्मीकि का राम भी हो जैसा
अन्य कितने राम हैं अयोध्या में रह रहे हैं
हरबना संत साधु राम के रूप जैसा
हम न गढ़ पाए यू राम के प्रतिरूप जैसा।
कर सके और पढ़ सके जब
राम को सम्पूर्ण जैसा.
राम है वह शक्ति जैसा
नाव अपनी अब लगा लो
केवट का के कर रूप है जैसा
हम न समझे क्या कहूं मैं
राम हैं जो कोई स्वरुप जैसा
जिसने जग को हैं गढ़ा  पर
श्रृष्टि का स्वरुप जैसा
राम की महिमा नहीं हैं
बस कहो राम ही हैं राम जैसा
बस कहो राम ही है राम जैसा।

श्रीकांत तैलंग
जयपुर

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