श्रीसाहित्य, जीवन, सुषमा सिंह

 


जीवन
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शाश्वत जग,
नश्वर जीवन,
जन्म मरण,
प्रकृति का नियम ।

मोह-माया,
उलझता मन,
करें सत्यकर्म,
सत्य जीवन ।

दुख का कारण,
आसक्त जीवन,
अनासक्त भाव,
वंदनीय जीवन ।

भाव   भूखे,
ईश्वरीय  होते,
प्रेम प्रसाद  से,
दर्शन   देते  ।

प्रेम समर्पण,
विराट  मन,
खंभे से  होता,
प्रभु का प्रकटीकरण ।

करो ध्यान,
प्रभु स्मरण,
गंगा जल जैसा
निर्मल   जीवन ।

               सुषमा सिंह
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स्वरचित एवं मौलिक




हमारा समाज      

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कितना वैविध्य पूर्ण है हमारा समाज जो हमें हजारों वर्जनाओं के साथ जीने को

मजबूर करता है । और वर्जनाएं भी कैसी जिसे परिस्थितियों के अनुसार बदल दिया जाता है ।यह कहानी कुछ सत्य घटनाओं 

पर आधारित है ।तब मैं ८ वीं या ९ वीं वर्ग में रही हूंगी ।उस समय हम लड़कियों को ऐसी बातों से दूर रखा जाता था जिसकी

जानकारी आवश्यक थी । किन्तु समाज में कुछ घटनाएं ऐसी घटित होती थीं जिनकी चर्चा हर तरफ होती थी। फलस्वरूप, इनकी जानकारी कमोबेश बड़े - छोटे सभी

आयु वर्ग के लोगों को हो जाती थी ।

                 पड़ोस में मेरी काकी के दो बेटे थे । पढ़ा लिखा सम्पन्न परिवार ।समाज में अच्छी पैठ । ऊंचे तबके के लोगों के संग उठना बैठना सबकुछ तो था। फिर भी काकी कभी-कभी उदास हो जाती थीं । कुरेदने पर भी किसी को कुछ नहीं बताती थीं ।हां उनका बड़ा बेटा कुछ स्त्रियोचित व्यवहार जरुर करता था । उसकी आवाज भी लड़कियों जैसी थी जिसकी चर्चा अक्सर पड़ोस के घरों में होती थी । काकी को पड़ोसियों की ये हरकत नागवार गुजरती थी और वे इसका 

प्रतिकार करतीं । लेकिन सच्चाई को कठोरता से दबाया नहीं जा सकता । किन्तु एक मां पुत्र मोह में पड़कर यही करतीं । हां यह सच था कि उनका बड़ा बेटा न लड़का था और न ही लड़की ।वह जो था हमारे समाज में उसे किसी और नाम (किन्नर) से जाना जाता है ,जिसे सामान्य परिवार में रहने का हक नहीं होता  । लेकिन काकी अपने सामर्थ्य के अनुसार उसकी शादी (बात छुपा कर) बड़े धूमधाम से कर देती हैं । शादी के बाद जब बात खुलती है तो हंगामा खड़ा हो जाता है । काकी कह सुन कर सभी को शान्त करती हैं और इतिहास में महाभारत का हवाला दे,कि परिस्थितियों के अनुसार सब कुछ जायज है। आपकी बेटी मां भी बनेगी और इस घर में राज करेगी । यह कहकर तेज तर्रार काकी सब का मुंह बंद कर देती हैं और अपने एक ममेरे भतीजे को अपने घर में बेटा बना कर रख लेती हैं । कुछ दिनों पश्चात उनके बेटे को एक बेटा भी होता है और फ़िर एक बेटी । सारा परिवार सुखी और संतुष्ट । हां उनका वह ममेरा भतीजा अब यहां स्थायी रुप से रहने लगा और उसे सभी अधिकार प्राप्त थे जो काकी के अपने दोनों बेटों को । कुछ दिनों के पश्चात काकी के छोटे बेटे की शादी भी धूमधाम से हो जाती है .

                           सुषमा सिंह, kama bigha,aurangabad, bihari

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